Tuesday, 17 December 2019

क्या CAB और NRC को साथ मे जोड़ना उचित है?

क्या CAA और NRC को साथ मे जोड़कर देखना उचित है ?

एक तर्क जो CAA को NRC के साथ जोड़ कर दिया जा रहा है ....उसे समझने की जरूरत है ....

कहा जा रहा है कि जैसे असम में हिन्दू और मुश्लिम अपनी नागरिकता सिध्द नही कर पाए तो सरकार CAA के जरिये वहां के हैं हिन्दुओ को तो नागरिकता दे देगी लेकिन मुश्लिमो को नही देगी ।
दरअसल ..
वहां पर बांग्लादेशी घुसपैठिये की समस्या है ...तो जाहिर है कि सरकार CAA के जरिये बांग्लादेशी हिन्दुओ को नागरिकता देना चाहती है ... NRC में रह गए भारतीय मुश्लिम नागरिकता की दूसरी प्रक्रिया अपनाएंगे जिसके लिए कुछ निश्चित वर्षो तक भारत मे रहना जरूरी है ...तो वे ये आसानी से साबित कर देंगे ..यानी उन्हें भी नागरिकता मिल ही जाएगी । जैसा की जिनके लिए कहा जा रहा है कि कही सेना के लोगो को भी बाहर कर दिया ...उनकी प्रक्रियाएं अभी चल ही रही है । सरकार ने नही कहा अभी की उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी ।

लेकिन अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम या तो वापस जाएंगे या फिर कैम्प में रहेंगे । जिसमे कोई दिक्कत नही होनी चाहिए ।

अब यह प्रश्न है कि कौन अवैध बांग्लादेशी है और कौन भारतीय मुश्लिम यह अंतर कैसे होगा ? 

इस पर सरकार की क्या प्रक्रिया है यह अध्ययन का विषय है । क्योंकि सरकार के लिए भी किसी मुश्लिम या हिन्दू को भी बांग्लादेशी साबित करना आसान नही होगा ....और अगर वो यह नही कर सकेगी तो भारतीय हिन्दू और मुश्लिम जो नागरिकता साबित नही कर सके वे किस देश के कहलाये जाएंगे ? इस पर CAA और NRC स्पष्ट नही है । और सरकार क्या उनमे भेदभाव करेगी ...क्योंकि सरकार यदि इन तीन देशों या अन्य देशों का साबित नही कर सकी तो CAA उन पर लागू नही हो सकेगा । 

तो नया सवाल पैदा होता है कि क्या सरकार उन्हें अवैध भारतीय हिन्दू और मुश्लिम कह सकेगी ? क्या हमेशा के लिए उन्हें कैम्प में रख सकेगी ...इसके लिए लड़ाई लड़ी जा सकती है लेकिन यह सिर्फ मुश्लिमो के लिए नही हो सकता ।

यदि बांग्लादेश के इतर हम 
अब इसी स्थिति में भारत के अन्य क्षेत्रों में क्या होगा यह देखें । मान लीजिए भारत का राजस्थान का कोई हिन्दू-मुश्लिम अपनी नागरिकता सिध्द नही कर पाया तो क्या होगा ? अब लोग कह रहे है कि CAA से हिन्दू को तो नागरिकता मिल जाएगी लेकिन मुश्लिम को नही .....ऐसा बिल्कुल नही हो सकता क्योंकि CAA सिर्फ तीन देशों के लिए है । कोई हिन्दू कैसे साबित करेगा कि वो इनमें से किस देश से आया है और भारतीय हिंदुओं का इस CAA से कोई मतलब नहीं रहेगा ।....यही बात मुश्लिम पर भी लागू होगी सरकार कैसे साबित करेगी कि वो मुश्लिम इन तीनो में से किस देश से आया है ?

अभी जो हिन्दू आये है उन्हें इन तीनो देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान ) में से किसी देश का पासपोर्ट या कागज दिखाकर ही उन्हें नागरिकता दी जा सकती है  । अन्यथा बिना देश का नाम स्पष्ठ किये CAA कैसे लागू करेंगे ?

अब सवाल यह बनता है कि NRC में जो हिन्दू और मुश्लिम नागरिकता सिध्द नही कर पाएंगे और जो भारतीय होंगे तो उनके साथ क्या होगा ? 
इस प्रश्न के समाधान के समय यदि सरकार कोई धार्मिक भेदभाव करती है तब उसका विरोध ज्यादा तर्कपूर्ण रहेगा ।

इसलिए अभी CAA और NRC को जोड़ने का तर्क अभी नही बनता । NRC में यदि कुछ ऐसा प्रावधान आता है तो उसे समझने के बाद ही इस स्तर का विरोध उचित रहेगा ।

तब भी दूसरी बात यह है कि किसी भी देश के लिए नेशनल सिटिजनशिप रजिस्टर होना अच्छी बात है उसमें कोई बुराई नही है ....क्योंकि आप कानूनी रूप से कैसे भारतीय व घुसपैठिये में अंतर कर सकेंगे । यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जरूरी रहता है । आप किसी भी विकशित देश मे भी यूँ ही जाकर वोटर कार्ड और आधारकार्ड बनाकर अवैध रूप से नही रह सकते जैसे भारत मे बाहर से आकर लोग रह लेते है । 

लोग इस पर भी तर्क देते है कि सरकार पूरे देश को लाइन में खड़ा करना चाहती है .....और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है लेकिन यह तो आधार कार्ड बनाते समय भी हुआ ही था । और सरकार क्या दस्तावेज मांगती है यह भी देखने का विषय रहेगा । जनता को सरकार को मुख्य मुद्दों पर लाने के लिए आवाज उठाते रहना होगा ।

इसलिए  सिर्फ इसलिए क्योंकि इसे मोदी सरकार लाई है 
NRC का विरोध जरूरी नही लगता हालांकि वो लाई नही है बहुत पुराने कोर्ट के आदेश को पूरा किया है फिर भी लेकिन  हाँ उसमे संवैधानिक मूल्यों के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो उसका विरोध आवश्यक है पर NRC या CAB  का नहीं । फिलहाल जब कि अपने ही देश के अल्पसंख्यकों को हमारा संविधान विशेष अधिकार धर्म के आधार पर देता है तो इन तीन देशों के अल्प संख्यकों को विशेष अधिकार देना भी संवैधानिक दृष्टि से भी गैरसंवैधानिक नही हो सकता है । हालांकि कोर्ट में मामला है तो वहां और अधिक स्पष्ट हो सकेगा ....वो अलग बात है कि उस पर भी लोग विश्वास न करे तो ।

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